सागर
 मध्य प्रदेश की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर शहर में एक विशाल आउटर रिंग परियोजना आकार लेने जा रही है. जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना का उद्देश्य शहर पर यातायात दबाव कम करना है और जबलपुर शहर को कई बड़े शहरों से बेहतर कनेक्टिवटी को आकार देना है. साथ ही जबलपुर शहर से लगे कस्बों को बेहतर कनेक्टिवटी देना है. 3 हजार 540 करोड़ की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना की लंबाई 114 किमी है। 

जिसमें प्रमुख रूप से नर्मदा नदी पर 750 मीटर लंबा पुल जबलपुर एयरपोर्ट के अलावा प्रमुख कस्बों को फोरलेन ग्रीनफील्ड हाइवे से जोड़ा जाएगा. इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा जबलपुर में बढ़ रहे बाहरी यातायात के दबाव को शहर के बाहर से निकालना है. इससे परियोजना से शहर के भीतर से गुजरने वाले वाहनों की ईंधन खपत कम होगी. सफर में लगने वाला वक्त कम होगा और शहर के आसपास लाॅजस्टिक हब आकार लेगा। 

जबलपुर को क्यों है आउटर रिंग रोड की जरूरत
मध्य प्रदेश के 4 प्रमुख महानगरों में शामिल जबलपुर तेजी से विकसित हो रहा है. यहां शहरीकरण की रफ्तार काफी तेज होने के कारण शहर में यातायात दबाव बढ़ रहा है. ये यातायात दबाव जहां शहरी जनसंख्या के लिए परेशानी का सबब है, तो शहर से गुजरने वाले भारी वाहनों के लिए भी बड़ी परेशानी की वजह बन रहा है। 

औद्योगिकीकरण के कारण माल वाहनों की रफ्तार धीमी होने के कारण यात्रा में समय ज्यादा लग रहा है और ईंधन की खपत ज्यादा हो रही है। 

सबसे बड़ी परेशानी शहर के भीतर सड़क सुरक्षा से जुड़ी है. लगातार ट्रैफिक जाम, सड़क दुर्घटनाएं और वाहनों की धीमी रफ्तार रहवासियों के साथ वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है. इसलिए ये विशाल प्रोजेक्ट आकार ले रहा है। 


5 फेज में तैयार हो रहा जबलपुर आउटर रिंग रोड
इस परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जबलपुर एयरपोर्ट और शहर से लगे कस्बे फोरलेन ग्रीनफील्ड हाईवे से जुड़ जाएंगे. जबलपुर के नजदीकी कस्बे शाहपुरा, मानेगांव, भिटौनी, कुशनेर और अमझेर जैसे कस्बों की शानदार कनेक्टिविटी हो जाएगी. इस परियोजना को आकार देने के लिए पांच हिस्सों में विभाजित किया गया है. सभी फेज पूरे होने पर जबलपुर आउटर रिंग आकार ले लेगा. आने वाले 2027 तक ये परियोजना पूरी तरह से आकार ले लेगी। 

प्रोजेक्ट में कई पुल, ROB, फ्लाईओवर और अंडरपास और ओवरपास
परियोजना को भले ही पांच चरण में बांटकर जबलपुर आउटर रिंग रोड तैयार की जा रही है, लेकिन कुल 114 किमी लंबी इस रिंग रोड में बड़े और छोटे पुल, आरओबी, अंडरपा, ओवरपास देखने मिलेंगे। 

बड़े पुल की संख्या     14
छोटे पुल की संख्या     37
फ्लाईओवर की संख्या    3
रेलवे ब्रिज (आरओबी)    4
वाहनों के लिए अंडरपास    12
हल्के वाहनों के लिए अंडरपास     23
एलिवेटेड स्ट्रक्चर की संख्या    2
ओवरपास की संख्या    3
पुलिया की संख्या     332

आउटर रिंग रोड बदल देगा शहर की तस्वीर और तकदीर
114 किमी लंबा आउटर रिंग रोड जबलपुर शहर की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम करेगा. ये महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट जबलपुर और महाकौशल अंचल के समग्र विकास का आधार बनेगा. रिंगरोड पर आवागमन शुरू होने से यूपी, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के वाहनों को शहर में प्रवेश करने की जरूरत नहीं होगी. महाकौशल अंचल में पर्यटन व्यावसाय को नए पंख लगेंगे. नर्मदा नदी के उद्गम अमरकंटक, भेड़ाघाट, धुआंधार जलप्रपात, ग्वारीघाट, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान जैसे पर्यटन स्थलों पर आसान पहुंच होगी। 

जबलपुर के आसपास के कस्बों बरेला, मानेगांव, कुशनेर,अमझर, पाटन, सिहोरा, शाहपुरा, अधारताल और गढ़ा जैसे इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. बाजार तक आसान पहुंच होने के कारण आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा. साथ ही मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों से संपर्क में सुधार होगा. आउटर रिंग रोड के कारण इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट, किसान और पर्यटकों को फायदा होगा. इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्टर की माल ढोने में ईंधन खपत कम होगी और यात्रा का समय कम होगा. किसान अपनी फसल, सब्जी कम समय और कम लागत में मंडी और बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। 

प्रोजेक्ट निर्माण में पर्यावरण पर विशेष ध्यान
इस प्रोजेक्ट की खास बात ये है कि इसमें पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है. इस प्रोजेक्ट के निर्माण में करीब 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया है. जो कि एक औद्योगिक अपशिष्ट होता है. इसके साथ ही प्रोजेक्ट किनारे पौधरोपण, ग्रीन बेल्ट (हरित पट्टी) विकास और आधुनिक जल निकासी व्यवस्था (Drainage System) तैयार की जा रही है, जो पर्यावरणीय संरक्षण में योगदान देगी। 

निवेशक, उद्योगपतियों और किसानों को उम्मीद
इस प्रोजेक्ट को लेकर विशेषकर निवेशकों, उद्योगपतियों और किसानों को काफी उम्मीद है. औद्योगिक क्षेत्रों, भंडारण केंद्र और लॉजिस्टिक्स पार्क से बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलने और पूरे क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है. जिससे स्थानीय समुदाय के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे. निवेशक और उद्योगपतियों को शहर के नजदीक उद्योग स्थापित करने, लॉजिस्टिक हब में निवेश करने और कम लागत पर अच्छे उत्पादन की उम्मीद जगी है। 

आरओबी अंडरपास ओवरपास भी होंगे (NHAI)
उद्योगपति नवनीत अग्रवाल कहते हैं कि "जबलपुर आउटर रिंग उद्योगों को नया आसमान देगी. इस रिंगरोड के किनारे उद्योग लगाने में काफी फायदा होगा. सीधी रोड कनेक्टिवटी, माल ढुलाई की लागत कम, समय की बचत और आसपास के इलाकों को रोजगार का अवसर मुहैया होगा." किसान रामकुमार कहते हैं कि जबलपुर शहर से लगे कस्बों और गांवों के लिए एक बड़ा बाजार नजदीक है, लेकिन भारी यातायात दबाव, वाहनों की धीमी रफ्तार और घंटों जाम के कारण हमारी लागत बढ़ जाती थी और देरी के कारण कई बार अच्छा मुनाफा नहीं मिलता था। 

मध्य प्रदेश के आर्थिकी में होगा मददगार
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते हैं कि "मध्य प्रदेश के महानगरों में शुमार जबलपुर प्रदेश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाता है. तेजी से बढ़ रहे शहरीकरण और वाहनों के कारण शहर में यातायात दबाव के कारण कई तरह के नुकसान हर वर्ग को झेलने पड़ते थे. रहवासी जहां ट्रैफिक की समस्याओं से परेशान रहते हैं, तो आसपास के इलाकों से अपनी फसल और सब्जियां वगैरह लाने वाले किसानों को भी विपरीत परिस्थितियों और अधिक लागत के कारण व्यावसाय में नुकसान होता था। 

वहीं उद्योगों की लागत माल ढुलाई की धीमी रफ्तार और ज्यादा ईंधन खपत के कारण बढ़ रही थी. इन बातों को ध्यान रखकर आउटर रिंग रोड का प्रोजेक्ट ना सिर्फ जबलपुर शहर बल्कि महाकौशल अंचल और मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास की अहम कड़ी होगा। 

 

#Ring Road

Source : Agency